Showing posts with label Lyrics. Show all posts
Showing posts with label Lyrics. Show all posts

Thursday, September 30, 2010

Hum hain raahi pyaar ke by Kishore Kumar

This is one of my most favorite Kishore songs. Full of meaning.


हम हैं राही प्यार के, हम से कुछ ना बोलिए
जो भी प्यार से मिला, हम उसी के हो लिए ||

दर्द भी हमें कबूल, चैन भी हमें कबूल
हम ने हर तरह के फूल, हार में पिरो लिए ||

धूप थी नसीब में, धूप में लिया हैं दम
चांदनी मिली तो हम, चांदनी में सो लिए ||

दिल पे आसरा किये, हम तो बस यूं ही जिये
एक कदम पे हंस लिए, एक कदम पे रो लिये ||

राह में पड़े हैं हम, कब से आप की कसम
देखिये तो कम से कम, बोलिये ना बोलिये ||

*** ***
चित्रपट: नौ दो ग्याराह (१९५७)
गीत: मजरूह सुलतानपुरी
स्वर: किशोर कुमार
संगीत: सचिन देव बर्मन
*** ***
Nau Do Gyarah, Mahrooh Sultanpuri, Kishore Kumar, Sachin Dev S D Burman

Wednesday, July 28, 2010

Ha Rusava Sod Sakhe

रफ़ीचं एक सदाबहार गाणं

हा रुसवा सोड सखे
पुरे हा बहाणा, सोड ना अबोला
झुरतो तुझ्या विना, घडला काय गुन्हा
बनलो निशाणा, सोड ना अबोला |

इश्काची दौलत उधळी तुझा हा नखरा
मुखचंद्रा भवती कितीक फिरती नजरा
फसवा राग तुझा, अलबेला नशीला
करी मदहोश मला
नुरले भान आता, जाहला जीव खुळा
पुरे हा बहाणा, सोड ना अबोला |

तुझे फितूर डोळे, गाती भलत्या गजला
मदनाने केले मुश्कील जगणे मजला
पाहुनी मस्त अदा, फुले अंगार असा
सावरू तोल कसा?
नको छळवाद आता, झालो कुर्बान तुला
पुरे हा बहाणा, सोड ना अबोला |


गीत: वंदना विटणकर
संगीत: श्रीकांत ठाकरे
*** ***

Saturday, October 24, 2009

Kisi Ki Muskurahaton Pe by Mukesh

My all time favorite song...
MUKESH - Kisi Ki Muskurahaton Pe

(Kisiki muskuraahaton pe ho nisaar
Kisika dard mil sake to le udhaar
Kisike waaste ho tere dil mein pyaar
Jeena issi ka naam hai) -2

(Maana apni jeb se fakeer hain
Phir bhi yaaron dil ke ham ameer hain) -2
Mitte jo pyaar ke liye woh zindagi
Jale bahaar ke liye woh zindagi
Kisi ko ho na ho hamein to aitbaar
Jeena issi kaa naam hai

(Rishta dil se dil ke aitbaar ka
Zinda hai hameen se naam pyaar ka) -2
Ke mar ke bhi kisi ko yaad aayenge
Kisi ke aansuon mein muskuraayenge
Kahega phool har kali se baar baar
Jeena issi kaa naam hai
Kisiki muskuraahaton pe ho nisaar..

Source

Friday, May 29, 2009

khel khel mein thaa ek raajaa

Shri Mangesh Padgaonkar is one of the most celebrated contemporary poet in Marathi Literature. His poems usually have a touch of humor and a philosophy towards life; that is of living it well and to its fullest. He also has composed some serious poems and his भातुकलीच्या खेळामधली is one among the top. This poem is immensely popular among youths and veterans alike. This poem was immortalized by the voice of Shri Arun Date and the music by Shri Yashwant Deo. Many of us grew listening to this Arun Date's song, as we referred to this poem, without much pondering over its intense meaning. Since when I have understood the meaning of this melodious song, I have felt the desire to translate it to either English or Hindi language. In the evening, when I almost decided to take up the task, I realized that, with my present mood, I had preferred Hindi over English for this particular poem. I felt that I would convey the feelings in the poem more easily in Hindi. While doing so, I have taken the liberty of using different expressions than those used in the original poem. But I have kept the theme same as the original every where in the poem. As I conclude my preface, I hope to have given justice to the poem to the best of my ability.


खेल खेल में था एक राजा और एक उस की रानी,
अधूरा रह गया खेल रह गयी अधूरी एक कहानी

राजा कहता 'मैं तो हूँ तेरे प्रेम का प्यासा भूखा
जुड़ी हुयी है मेरे भाग्य से तेरे हाथ की रेखा'
यह सुन के क्यों आया रानी के नयनो में पानी?

रानी सोचके कहती देखते दूर दूर का तारा
'नहीं है मैंने सोचा हो कल दूजे नगर का फेरा'
किंतु राजा देर से समझा गूढ़ अटल यह बानी!

राजा पूछे उससे 'क्यों दो जीव मिलते हैं?
खिलने से पहले ही क्यों कुछ फूल बिखर जातें हैं?'
इन प्रश्नों का कोई उत्तर दे नहीं पायी रानी

क्या रानी ने छलके आंसू जाते नगर से कुछ दूर?
क्या राजा सह पाया सदमा देखके सपने चूर?
समय के साथ हवा में फहली एक उदास विरानी

खेल खेल में था इक राजा और एक उस की रानी,
अधूरा रह गया खेल रह गयी अधूरी एक कहानी

*** ***
राग : वृंदावनी सारंग (नादवेध)
मूल मराठी कविता के संगीत के आधार पर गायी जा सकती है |
*** ***
bhatukalichya khela madhali English translation interpretation
मंगेश पाडगांवकर

Saturday, May 09, 2009

yeh dil yeh paagal dil meraa by Ghulam Ali

This beautiful Urdu gazal has some words which have kept me guessing about what they stand for and also have made me wonder if I have spelled them correctly. I have highlighted them with red colour. I will be grateful if someone tells me the significance and the correct spelling of these words through the comment box displayed below the post.


ये दिल ये पागल दिल मेरा
क्यों बूझ गया? आवारगी ...
इस दश्त में इक शहर था
वो क्या हुआ? आवारगी ... ||१||

कल शब मुझे बेशक्ल की
आवाज ने चौंका दिया
मैंने कहा, 'तू कौन है?'
उसने कहा, 'आवारगी' ... ||२||

इक तू कि सदियों से मेरे
हमराह भी, हमराज भी
इक मैं कि तेरे नाम से
लायाश ना, आवारगी ... ||३||

ये दर्द की तन्हाईयाँ
ये दश्त का वीरां सफर
हम लोग तो उकता गए
अपनी सुना, आवारगी ... ||४||

लोगों भला ऊस शहर में
कैसे जियेंगे हम
जहाँ, हो जुर्म तन्हा सोचना
लेकिन सजा, आवारगी ... ||५||

इक अजनबी झौंके ने जब
पूछा मेरे ग़म का सबब
सेहरा की भीगी रेत पर
मैंने लिखा, आवारगी ... ||६||

कल रात तन्हा चाँद को
देखा था मैंने ख़्वाब में
मुहसीन मुझे रास आयेगी
शायद सदा, आवारगी ... ||७||

ये दिल ये पागल दिल मेरा
क्यों बूझ गया? आवारगी ...
इस दश्त में इक शहर था
वो क्या हुआ? आवारगी ... ||

*** ***

स्वर : गुलाम अली

*** ***



*** ***
ye dil ye pagal dil mera

bhatukalichya-khelaa-madhali

भातुकलीच्या खेळामधली राजा आणिक राणी
अर्ध्यावरती डाव मोडला, अधुरी एक कहाणी

राजा वदला, 'मला समजली, शब्दावाचून भाषा
माझ्या नशिबासवे बोलती तुझ्या हातच्या रेषा'
का राणीच्या डोळा तेव्हा दाटुनि आले पाणी?

राणी वदली बघत एकटक दूरदूरचा तारा
'उद्या पहाटे दुस-या वाटा, दुज्या गावचा वारा'
पण राजाला उशिरा कळली गूढ अटळ ही वाणी!

तिला विचारी राजा,'का हे जीव असे जोडावे?
का दैवाने फुलण्याआधी, फूल असे तोडावे ?'
या प्रश्नाला उत्तर नव्हते, राणी केविलवाणी

का राणीने मिटले डोळे दूर दूर जाताना ?
का राजाचा श्वास कोंडला गीत तिचे गाताना ?
वा-यावरती विरून गेली एक उदास विराणी

भातुकलीच्या खेळामधली राजा आणिक राणी
अर्ध्यावरती डाव मोडला, अधुरी एक कहाणी

*** ***

शब्द : मंगेश पाडगावकर
संगीत : यशवंत देव
स्वर : अरुण दाते
राग : वृंदावनी सारंग (नादवेध)

*** ***



*** ***
bhaatukalichyaa, Mangesh Padgaonkar, Padgavkar, Yashawant Dev, Deo, Arun Date
*** ***
I have translated this song in Hindi.
Click here to read the translation.


Sunday, April 26, 2009

mujhse biChad ke - Jagjit Singh


मुझ से बिछड के खुश रहते हो
मेरी तरह तुम भी झूठे हो

इक टहनी पे चाँद टिका था
मैं यह समझा तुम बैठे हो

उजले उजले फूल खिले थे
बिल्कुल जैसे तुम हसते हो

तुम तनहा दुनिया से लडोगे
बच्चों सी बातें करते हो

मुझ से बिछड के खुश रहते हो ...

*** ***

स्वर: जगजीत सिंह (सहेर)

*** ***



*** ***
saher

Saturday, April 25, 2009

yeh daulat bhi le lo - Jagjit Singh


यह दौलत भी ले लो, यह शौहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझ से मेरी जवानी
मगर मुझ को लौटा दो बचपन का सावन
वह कागज़ की कश्ती, वह बारीश का पानी

मुहल्ले की सब से पुरानी निशानी
वह बुढिया जिसे बच्चे कहते थे नानी
वह नानी की बातों में परियों का डेरा
वह चेहरे की झुरियों में सदियों का फेरा
भुलाएँ नहीं भूल सकता है कोई
वह छोटी सी रातें, वह लंबी कहानी

कडी धूप में अपने घर से निकलना
वह चिडिया, वह बुलबूल, वह तितली पकडना
वह गुडिया की शादी पे लडना झगडना
वह झूलों से गिरना, वह गिर के संभलना
वह पीतल के छल्लों के प्यारे से तोहफे
वह टूटी हुयी चूडियों की निशानी

कभी रेत के ऊँचे टीलों पे जाना
घरौंदे बनाना, बनाकर मिटाना
वह मासूम चाहत की तसवीर अपनी
वह ख्वाबों खिलौनों की जागीर अपनी
ना दुनिया का गम था, न रिश्तों के बंधन
बडी खूबसूरत थी वह जिंदगानी

यह दौलत भी ले लो, यह शौहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझ से मेरी जवानी
मगर मुझ को लौटा दो बचपन का सावन
वह कागज़ की कश्ती, वह बारीश का पानी

*** ***
स्वर: जगजीत सिंह

*** ***



*** ***
वो कागज की कश्ती, yeh doulat bhi le lo

hum tere shahar mein aaye hain - Ghulam Ali


हम तेरे शहर में आयें हैं मुसाफिर की तरह
सिर्फ़ इक बार मुलाक़ात का मौका दे दे ...

मेरी मंजील है कहाँ, मेरा ठिकाना है कहाँ?
सूबह तक तूझ से बिछड कर मुझे जाना है कहाँ?
सोचने के लिए इक रात का मौका दे दे ...

अपनी आंखों में छूपा रखे हैं जुगनू मैंने
अपनी पलकों पे सजा रखे हैं आंसू मैंने
मेरी आंखों को भी बरसात का मौका दे दे ...

आज की रात मेरा दर्द-ऐ-मुहब्बत सुन ले
कपकपाते हुए होठों की शिकायत सुन ले
आज इज़हार-ऐ-ख़यालात का मौका दे दे ...

भूलना था तो ये इकरार किया ही क्यों था?
बेवफा तू ने मुझे प्यार किया ही क्यों था?
सिर्फ़ दो चार सवालात का मौका दे दे ...

हम तेरे शहर में आयें हैं मुसाफिर की तरह
सिर्फ़ इक बार मुलाक़ात का मौका दे दे ...

*** ***

गीत: कैसर उल जाफरी
स्वर: गुलाम अली

*** ***


*** ***
Ghulam Ali, Qaiser Ul Jafri, hum tere shahar mein aaye hain musafir ki tarah


Saturday, April 11, 2009

bebasi jurm hai - lyrics


बेबसी जुर्म है, हौसला जुर्म है
जिंदगी तेरी इक इक अदा जुर्म है ॥

ऐ सनम तेरे बारे में कुछ सोचकर
अपनी बारे में कुछ सोचना जुर्म है ॥

याद रखना तूझे मेरा इक जुर्म था
भूल जाना तूझे दूसरा जुर्म है ॥

क्या सितम हैं कि तेरे हसीं शहर में
हर तरफ गौर से देखना जुर्म है ॥

*** ***
शायर:
स्वर: जगजीत सिंह
अल्बम: In Search

*** ***


Sunday, April 05, 2009

konas thauk kasa

कोणास ठाऊक कसा पण सिनेमात गेला ससा
सश्याने हलविले कान, घेतली सुंदर तान ... सा नि ध प म ग रे, सा रे ग म प sss
दिग्दर्शक म्हणाला "वा वा", ससा म्हणाला "चहा हवा!"

कोणास ठाऊक कसा पण सर्कशीत गेला ससा
सश्याने मारली उडी, भर भर चढला शिडी
विदूषक म्हणाला "छान छान", ससा म्हणाला "काढ पान!"

कोणास ठाऊक कसा पण शाळेत गेला ससा
सश्याने म्हंटले पाढे ... बे एकं बे बे दोनी चार बे त्रिक सहा, बे चौक आsssठ
सश्याने म्हंटले पाढे घडघड वाचले धडे
गुरूजी म्हणाले "शाब्बास", ससा म्हणाला "करा पास!"

कोणास ठाऊक कसा पण शाळेत गेला ससा

*** ***
गीत: राजा मंगळवेढेकर
स्वर: शमा खडे
संगीत: पं. श्रीनिवास खळे

*** ***

*** ***

Saturday, March 21, 2009

tere khushaboo mein base khat by Jagjit Singh

तेरे खुशबू में बसे ख़त मैं जलाता कैसे?
प्यार में डूबे हुये ख़त मैं जलाता कैसे?
तेरे हाथों के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे?

जिन को दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा,
जिन को इक ऊम्र कलेजे से लगाए रखा,
दिन जिन को जिन्हें इमान बनाए रखा ...

जिन का हर लब्ज मुझे याद पानी की तरह,
याद थे मुझ को जो पैगाम-ए-जुबानी की तरह,
मुझ को प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह ...

तूने दुनिया की निगाहों से जो बचकर लिखे,
साल-हा-साल मेरे नाम बराबर लिखे,
कभी दिन में तो कभी रात को उठकर लिखे ...

तेरे खुशबू में बसे ख़त मैं जलाता कैसे ...
प्यार में डूबे हुये ख़त मैं जलाता कैसे ...
तेरे हाथों के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे ...
तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ,
आग बहते हुये पानी में लगा आया हूँ।।

*** ***
शायर :
स्वर : जगजीत सिंह

*** ***



*** ***
ग़ज़ल, नज्म, Revival With Jagjit Singh, 1993

Wednesday, March 18, 2009

kuchh na kuchh to jaroor honaa hai - by jagjit singh

कुछ ना कुछ तो जरूर होना है,
सामना आज उनसे होना है।

तोडो फेंको रखो, करो कुछ भी,
दिल हमारा है क्या खिलौना है?

जिंदगी और मौत का मतलब,
तुमको पाना है तुमको खोना है ।

इतना डरना भी क्या है दुनिया से,
जो भी होना है, वो तो होना है।

उठ के महफ़िल से मत चले जाना,
तुमसे रोशन ये कोना कोना है।

शायर:
स्वर: जगजीत सिंह

Click here to play this song


***
Jagjit Singh

charag-o-aftab gum badi haseen raat thi - gazal by Jagjit Singh

चराग-ओ-आफताब गूम, बड़ी हसीन रात थी,
शबाब की नकाब गूम, बड़ी हसीन रात थी।

मुझे पिला रहे थे वो कि ख़ुद ही शम्मा बुझ गयी,
गिलास गूम शराब गूम, बड़ी हसीन रात थी।

लिखा था जिस किताब में कि इश्क तो हराम है,
हुई वही किताब गूम, बड़ी हसीन रात थी।

लबों से लब जो मिल गए, लबों से लब ही सिल गए,
सवाल गूम जवाब गूम, बड़ी हसीन रात थी।

चराग-ओ-आफताब गूम बड़ी हसीन रात थी,
शबाब की नकाब गूम बड़ी हसीन रात थी॥

शायर: सुदर्शन फ़ाकिर
स्वर: जगजीत सिंह

Click here to play this song

***
Jagjit Singh, Gulzar

Monday, March 02, 2009

mud mud ke na dekh - Shree 420

I like this song for its magnificent set, for its orchestration, its picturization and choreography. I like this song for initial glimpse of beautiful Nargis, beautiful and elegant Nadira and the handsome Raj Kapoor. I like this song for its change in rhythm and change in the mood halfway through the song. I like this song for the way it is written and also for its meaningfulness. I like this song for its place in the film. The film would be incomplete if this song was not there.

मुड़ मुड़ के ना देख मुड़ मुड़ के
जिंदगानी के सफर में
तू अकेला ही नहीं है
हम भी तेरे हमसफ़र हैं

आए गए मंजिलों के निशाँ
लहरा के झूमा झूका आसमाँ
लेकिन रुकेगा न ये कारवां

नैनो से नैना जो मिला के देखे
मौसम के साथ मुस्कूरा के देखे
दुनिया उसी की है जो आगे देखे

दुनिया के साथ जो बदलता जाए
जो इसके सांचे में जो ढलता जाए
दुनिया उसी की है जो चलता जाए

मुड़ मुड़ के ना देख मुड़ मुड़ के...

***
गीत : शैलेन्द्र
संगीत : शंकर - जयकिशन
स्वर : आशा भोसले, मन्ना डे
चित्रपट : श्री ४२० (१९५५)

BHONSLE, MANNA DE, RAJ KAPOOR , NARGIS , NADIRA , LALITA PAWAR , IFTEKHAR

*** ***


Friday, January 02, 2009

apni marzi se kahan apne - Jagjit Singh


अपनी मर्जी से कहाँ अपने सफर के हम हैं,
रुख हवाओं का जिधर का है, उधर के हम हैं ||

पहले हर चीज थी अपनी मगर अब लगता है,
अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं ||

वक्त के साथ मिट्टी का सफर सदियों से,
किस को मालूम कहाँ के हैं, किधर के हम हैं ||

चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफिर का नसीब,
सोचते रहते हैं, किस राह गुजर के हम हैं |

(रुख हवाओं का जिधर का है, उधर के हम हैं,
अपनी मर्जी से कहाँ अपने सफर के हम हैं ...)

***

गीत : शायर निदा फाजली
स्वर, संगीत : जगजीत सिंह

***

Get this widget | Track details | eSnips Social DNA


***

Nida Fazli

Friday, December 12, 2008

jeevan ke din - bade dilwala



जीवन के दिन छोटे सही, हम भी बड़े दिलवाले
कल की हमें फुरसत कहाँ, सोचें जो हम मतवाले ||

जीने का रंगीन मौसम, ये खूबसूरत ज़माना
अपने यही चार पल हैं, आगे है क्या किस ने जाना |
जीना जिसे आता है वो, इन मे ही मौज मना ले
कल की हमें फुरसत कहाँ, सोचें जो हम मतवाले ||

ये जिंदगी दर्द भी है, ये जिंदगी है दवां भी
दिल तोड़ना ही न जाने, जाने ये दिल जोड़ना भी |
इस जिंदगी का शुक्रिया, सद के मैं ऊपरवाले
कल की हमें फुरसत कहाँ, सोचें जो हम मतवाले ||

***

गीत : मजरूह सुल्तानपुरी
संगीत : राहुलदेव बर्मन
स्वर : किशोर कुमार
चित्रपट : बडे दिलवाला (१९८२)

***



***
"Bade Dilwala", Rahul Dev Burman, R D Burman, Kishore Kumar, Majarooh Sultanpuri, Rishi Kapoor, Tina Munim, Sarika
***

Tuesday, December 02, 2008

sunya sunya maiphileet majhyaa



सुन्यासुन्या मैफिलीत माझ्या तुझेच मी गीत गात आहे,
अजूनही वाटते मला की, अजूनही चांदरात आहे ||

उगीच स्वप्नात सावल्यांची कशास केलीस आर्जवे तू,
दिलेस का प्रेम तू कुणाला तुझ्याच जे अंतरात आहे ||

कळे न मी पाहते कुणाला, कळे न हा चेहरा कुणाचा,
पुन्हा पुन्हा भास होत आहे तुझे हसू आरशात आहे ||

उगाच देऊ नकोस हाका, कुणी इथे थांबणार नाही
गडे, पुन्हा दूरचा प्रवासी कुठेतरी दूर जात आहे ||

सख्या तुला भेटतील माझे तुझ्या घरी सूर ओळखीचे,
उभा तुझ्या अंगणी स्वरांचा अबोल हा पारिजात आहे ||

***

गीत - सुरेश भट
संगीत - पं. हृदयनाथ मंगेशकर
स्वर - लता मंगेशकर
चित्रपट - उंबरठा (१९८१)
राग - पटदीप (नादवेध)

***



***
"sunya sunya maiphileet majhya", "sunyaa sunyaa" from Umbaratha, Suresh Bhat, Hridaynath Mangeshkar, Lata Mangeshkar, Smita Patil, Girish Karnad
***

Thursday, November 27, 2008

ganjalyaa othaas maajhyaa



गंजल्या ओठास माझ्या धार वज्राची मिळू दे,
आंधळ्या आत्म्यात माझ्या सूर्य सत्याचा जळू दे ||

पांगळा बंदिस्त माझा जन्म आकाशून जावो,
वादळी आवेग माझा चार भिंतींना कळू दे ||

सारखे सौंदर्य माझ्या कोरड्या गात्री खळाळो,
सारखे अस्तित्व माझे पेटताना दरवळू दे ||

लाभु दे लाचार छाया मोठमोठ्यांना परंतू,
तापल्या मातीत माझा घाम मानाने गळू दे ||

आणु दे गा वंचकांना क्रूस छ्द्माचा दयाळा,
रक्त येशूचे परी डोळ्यांत माझ्या साकळू दे ||

***

गीत - सुरेश भट
संगीत - पं. हृदयनाथ मंगेशकर
स्वर - रवींद्र साठे
चित्रपट - उंबरठा (१९८१)

***



***
"ganjalyaa othaas maajhyaa", "ganjalya othas majhya" from Umbaratha, Suresh Bhat, Hridaynath Mangeshkar, Ravindra Sathe, Smita Patil
***

Monday, November 24, 2008

Celebration of Life - 'nahi punyachi mojani'

There are many ways in which the existence of the human being, or of any other creature for that matter, can be described. Each one of these ways has some uniqueness in its description. Well known Marathi poet B. B. Borkar described this existence as a sublime physical entity where upon a duty to undergo the cycle of life is entrusted by The Creator, Brahma as per the Hindu philosophy and beliefs. As per this philosophy, each of the creatures has a certain brahma-tatva inside him. The brahma-tatva can be best defined as the elemental extract of The Creator himself. This idea is not much different than the amber eyes inherited by the son from his father or the blonde hair inherited by the daughter from her mother. This brahma-tatva leads us to follow a certain destiny as per the philosophy. Poet Borkar has presented this philosophy in a metaphorical manner in the Marathi poem, ‘náhi puNnyáchi mojaNie’. The metaphors he has presented are simple but the message that his poem conveys is in sound conformation with the Hindu philosophy. In this article, I have made an effort to interpret the poem to the best of my ability and to present the same poem in English even though it is next to impossible for me to match the precision and economy of Poet Borkar. If the English version conveys the message even partly, I will consider it as a great achievement for my limited literary ability.


Celebration of Life

We don’t count any good deed
To no guilt we need to pay heed
Like the sacred waters of Ganga
Caressing the bed of rocks with a great speed.

We don’t involve us, nor do we indulge
No fear of disappointment, nor any grudge
Like the pollens traveling from flower to flower
Riding on the wind created by His power.

We’ve no form, no name, but the trance
Like the sky and its vast expanse
Incense stick to the blue fragrance
Filling His space with its pleasing advance.

We see us as the flowers offered to Him
Flowers celebrating their life at His feet
With a leap into the sacred water
Then in the womb of the Mother Earth, they enter
Till His next call, they will get sooner or later.

***
Original Marathi Poem

नाही पुण्याची मोजणी
नाही पापाची बोचणी
जिणे गंगौघाचे पाणी

कशाचा न लागभाग
कशाचा न पाठलाग
आम्ही हो फुलांचे पराग

आम्हा नाही नाम-रूप
आम्ही आकाश स्वरूप
जसा निळा निळा धूप

पुजेतल्या पानाफुला
मृत्यू सर्वांग सोहळा
धन्य निर्माल्याची कळा

***

गीत : बा. भ. बोरकर
संगीत : पं. जितेंद्र अभिषेकी

***

Musical rendering of the poem by Pt. Jitendra Abhisheki