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Saturday, April 11, 2009

bebasi jurm hai - lyrics


बेबसी जुर्म है, हौसला जुर्म है
जिंदगी तेरी इक इक अदा जुर्म है ॥

ऐ सनम तेरे बारे में कुछ सोचकर
अपनी बारे में कुछ सोचना जुर्म है ॥

याद रखना तूझे मेरा इक जुर्म था
भूल जाना तूझे दूसरा जुर्म है ॥

क्या सितम हैं कि तेरे हसीं शहर में
हर तरफ गौर से देखना जुर्म है ॥

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शायर:
स्वर: जगजीत सिंह
अल्बम: In Search

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Saturday, March 21, 2009

tere khushaboo mein base khat by Jagjit Singh

तेरे खुशबू में बसे ख़त मैं जलाता कैसे?
प्यार में डूबे हुये ख़त मैं जलाता कैसे?
तेरे हाथों के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे?

जिन को दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा,
जिन को इक ऊम्र कलेजे से लगाए रखा,
दिन जिन को जिन्हें इमान बनाए रखा ...

जिन का हर लब्ज मुझे याद पानी की तरह,
याद थे मुझ को जो पैगाम-ए-जुबानी की तरह,
मुझ को प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह ...

तूने दुनिया की निगाहों से जो बचकर लिखे,
साल-हा-साल मेरे नाम बराबर लिखे,
कभी दिन में तो कभी रात को उठकर लिखे ...

तेरे खुशबू में बसे ख़त मैं जलाता कैसे ...
प्यार में डूबे हुये ख़त मैं जलाता कैसे ...
तेरे हाथों के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे ...
तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ,
आग बहते हुये पानी में लगा आया हूँ।।

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शायर :
स्वर : जगजीत सिंह

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ग़ज़ल, नज्म, Revival With Jagjit Singh, 1993

Friday, August 22, 2008

kabhi khamosh baithoge - Jagjit Singh


कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे
मैं उतना याद आऊँगा मुझे जितना भुलाओगे

कोई पूछ बैठेगा खामोशी का सबब तुम से
बहोत समाझाना चाहोगे मगर समझा ना पाओगे

कभी दुनिया मुकम्मल बन के आयेगी निगाहो में
कभी मेरी कमी दुनिया की हर इक शय में पाओगे

कही पर भी रहे हम तो मोहब्बत फिर मोहब्बत है
तुम्हे हम याद आएंगे हमे तुम याद आओगे

स्वर : जगजीत सिंह
"Love is Blind"