कोणास ठाऊक कसा पण सिनेमात गेला ससा सश्याने हलविले कान, घेतली सुंदर तान ... सा नि ध प म ग रे, सा रे ग म प sss दिग्दर्शक म्हणाला "वा वा", ससा म्हणाला "चहा हवा!"
कोणास ठाऊक कसा पण सर्कशीत गेला ससा सश्याने मारली उडी, भर भर चढला शिडी विदूषक म्हणाला "छान छान", ससा म्हणाला "काढ पान!"
कोणास ठाऊक कसा पण शाळेत गेला ससा सश्याने म्हंटले पाढे ... बे एकं बे बे दोनी चार बे त्रिक सहा, बे चौक आsssठ सश्याने म्हंटले पाढे घडघड वाचले धडे गुरूजी म्हणाले "शाब्बास", ससा म्हणाला "करा पास!"
तेरे खुशबू में बसे ख़त मैं जलाता कैसे? प्यार में डूबे हुये ख़त मैं जलाता कैसे? तेरे हाथों के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे?
जिन को दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा, जिन को इक ऊम्र कलेजे से लगाए रखा, दिन जिन को जिन्हें इमान बनाए रखा ...
जिन का हर लब्ज मुझे याद पानी की तरह, याद थे मुझ को जो पैगाम-ए-जुबानी की तरह, मुझ को प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह ...
तूने दुनिया की निगाहों से जो बचकर लिखे, साल-हा-साल मेरे नाम बराबर लिखे, कभी दिन में तो कभी रात को उठकर लिखे ...
तेरे खुशबू में बसे ख़त मैं जलाता कैसे ... प्यार में डूबे हुये ख़त मैं जलाता कैसे ... तेरे हाथों के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे ... तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ, आग बहते हुये पानी में लगा आया हूँ।।
*** *** शायर : स्वर : जगजीत सिंह
*** ***
*** *** ग़ज़ल, नज्म, Revival With Jagjit Singh, 1993
I like this song for its magnificent set, for its orchestration, its picturization and choreography. I like this song for initial glimpse of beautiful Nargis, beautiful and elegant Nadira and the handsome Raj Kapoor. I like this song for its change in rhythm and change in the mood halfway through the song. I like this song for the way it is written and also for its meaningfulness. I like this song for its place in the film. The film would be incomplete if this song was not there.
मुड़ मुड़ के ना देख मुड़ मुड़ के जिंदगानी के सफर में तू अकेला ही नहीं है हम भी तेरे हमसफ़र हैं
आए गए मंजिलों के निशाँ लहरा के झूमा झूका आसमाँ लेकिन रुकेगा न ये कारवां
नैनो से नैना जो मिला के देखे मौसम के साथ मुस्कूरा के देखे दुनिया उसी की है जो आगे देखे
दुनिया के साथ जो बदलता जाए जो इसके सांचे में जो ढलता जाए दुनिया उसी की है जो चलता जाए
मुड़ मुड़ के ना देख मुड़ मुड़ के...
*** गीत : शैलेन्द्र संगीत : शंकर - जयकिशन स्वर : आशा भोसले, मन्ना डे चित्रपट : श्री ४२० (१९५५)
BHONSLE, MANNA DE, RAJ KAPOOR , NARGIS , NADIRA , LALITA PAWAR , IFTEKHAR